About Us

About us - 
सर्वोदय सामाजिक संस्था "जियो और जीने दो" और "अहिंसा परमोधर्म:" के पावन मंत्र को साधते हुए जीवदया व सामाजिक क्षेत्र में निरंतर कार्यरत है। संस्था की स्थापना 22 सितंबर 2017 को संस्थापक अध्यक्ष श्री पंकज जैन जी के नेतृत्व में हुई । तब से अब तक प्राणी सेवा व सामाजिक कल्याण के कार्यों में सर्वोदय अपनी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। अपने तरह के अनोखे कार्यों, नवाचार व अभिनव पहल से राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित एनजीओ *सर्वोदय सामाजिक संस्था* द्वारा मानवीय पतन की रोकथाम व हिंसा से बचाव हेतु *अहिंसा महामहोत्सव* जैसे अद्धभुत आयोजन कर राष्ट्रहित में अपना योगदान दिया जा रहा है।
प्रतिष्ठित दीर्घा में स्थित हो सर्वोदय ने अब मदर एनजीओ के रूप में देशभर में अपना विस्तार करना प्रारंभ कर दिया है। जीवदया के क्षेत्र में पशु-पक्षियों को दाना-पानी मुहैया कराने और प्राणीसेवा जागरूकता अभियान से प्रेरित होकर सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक संगठनों समेत व्यक्तिगत तौर पर भी लोग प्राणी सेवा को आगे आये हैं। यही कारण है कि संस्था के प्रयासों से पशु-पक्षियों को दाना-पानी देना आज लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है।
संस्था समाज में व्याप्त कुरीतियों, अन्याय, अत्याचार अशिक्षा, अंधविश्वास, जैसी बुराईयों से लड़ते हुए एक शिक्षित, सभ्य व समृद्ध समाज के निर्माण के स्वप्न को सार्थक करने हेतु सतत् प्रयत्नशील है।
राष्ट्र के निर्माण में सहभागिता व प्राणी मात्र की सेवा करना संस्था की प्राथमिकता है। इसी लक्ष्य को लेकर राष्ट्र निर्माण की दिशा में विशेषकर बच्चों, युवाओं व महिलाओं को सक्रिय योगदान हेतु प्रेरित करने तथा समाज के प्रति उनके दायित्वों का बोध कराने के काम में सर्वोदय सामाजिक संस्था के माध्यम से श्री जैन और उनके साथी सतत् प्रयासरत् हैं । यही कारण है, कि आज "सर्वोदय सामाजिक संस्था" राष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बना चुकी है। आज सर्वोदय मदर एनजीओ के रूप में देशभर में अपनी सेवाएं दे रहा है। संस्था का मकसद राष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसा संगठन खड़ा करना है जो समाज में व्याप्त सामाजिक बुराईयों, भ्रष्टाचार, अन्याय, अत्याचार, अनाचार, शोषण इत्यादि के खिलाफ बिना किसी दबाव में आये, आम आदमी व प्राणी मात्र की लड़ाई नैतिक मूल्यों के साथ लड़ सके और निडरता व निष्पक्षता से बगैर यह देखे की अन्याय का वजूद (ताकत) क्या है। अपना कार्य कर सके। यदि आप हमारे मकसद से सहमत हैं, समाज व देश के लिए कुछ करने का जज़्बा व जोश अपने अंदर रखते हैं, तो हमारे साथ जुड़कर हमे और अपने आप को और अधिक मजबूत बनायें। हम निरंतर नारी सशक्तिकरण, भ्रष्टाचार मुक्त भारत, नशामुक्त भारत, मांसाहारमुक्त भारत, अनीतिमुक्त भारत व हिंसा मुक्त भारत बनाने के क्षेत्र में कार्य करने के साथ ही स्वास्थ्य, शिक्षा, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, कौशल विकास, रोटी कपड़ा और मकान समेत अनेक क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। मानवाधिकारों की रक्षार्थ कार्य करते हुए हमारे द्वारा समाज कल्याण की बेहद ही महत्वपूर्ण योजनाओं का संचालन करने के प्रयास किये जा रहे हैं, जहां एक और मजदूरों के हितार्थ संगठन बनाकर कार्य किये जा रहे हैं, तो वहीं "अहिंसा गौसेवा दल" बनाकर गौमाता की सेवा के अनोखे प्रयास भी संस्था द्वारा किये जा रहे है। जिसमें ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में विभिन्न स्तरों पर अनेक दल बनाकर व्यवस्थित तरीके से गौमाता व अन्य पशुओं को भोजन व चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के साथ ही आवश्यकतानुसार गौशालाओं के निर्माण के प्रयास भी किये जा रहे हैं। हमे आपको यह बताते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है. कि बुजुगों समेत सभी जरुरतमंदों को विभिन्न स्थानों पर आवासीय परिसर विकसित कर वहां भोजन, आवास, चिकित्सा, शिक्षा, रोजगार आदि उपलब्ध कराने का लक्ष्य है, जिसे हमने *आचार्य श्री विद्यासागर सर्वोदय धाम* का नाम दिया है। जो वाकई समाज सेवा व मानव कल्याण के क्षेत्र में एक अतुलनीय प्रयास साबित होने के साथ ही दुनियाभर के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बनेगा। 'आचार्य श्री विद्यासागर सर्वोदय" धाम मुख्य रूप से बेसहारा वृद्धजनों को समर्पित है। इसके द्वार हमेशा ऐसे लोगों के लिए खुले रहेंगे जो निराश्रित, अकेले और असहाय है इतना ही नहीं इसी प्रांगण में जरूरतमंदों को निःशुल्क या नाममात्र की शुल्क पर भोजन उपलब्ध कराया जावेगा जिससे समाज का गरीब वर्ग भूख जैसी असहनीय पीड़ा से निजात पा सके। *आचार्य श्री विद्यासागर सर्वोदय धाम* वास्तव में मानवीय मूल्यों का जीवंत उदाहरण होगा। इस हेतु इन सभी कार्यों के संचालन व लक्ष्य पूर्ति के लिए हम गुल्लक योजना भी लेकर आये हैं, जिससे समाज का हर तबका समाज कल्याण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दर्ज करा सके हम समाज के सक्षम व पुण्यशाली महानुभावों से भी अपील करते हैं, कि वह सभी बड़चड़कर आगे आये और तन-मन-धन से प्राणी कल्याण के क्षेत्र में अपनी अग्रणी भूमिका निभायें मुक्त हस्थ से दान दें जिससे आपकी चंचला लक्ष्मी के सदुपयोग के साथ ही हमारे देश से गरीबी अशिक्षा, बेराजगारी, अपराध व भ्रष्टाचार का दमन हो सके और हम विश्व पटल पर अपनी अहिंसक व विश्व गुरु की छवि को पुनः स्थापित कर उसे बरकरार रख सकें। इन्हीं शब्दों के साथ संस्था आपसे सहयोग की अपेक्षा करती है।
क्योंकि आज समाज सेवा का क्षेत्र राजनीति से भी ज्यादा चुनौती भरा हो गया है। समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारियां केवल पद पर रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि हम जीवनभर समाज के अंग बने रहते हैं। सामाजिक संस्था सबके सहयोग से ही आगे बढ़ सकती है। समाज के माध्यम से ही हम शहर, प्रदेश और राष्ट्र के प्रति अपने कर्त्तव्य निभाकर जागरुक नागरिक होने का परिचय दे सकते हैं।
निश्चित ही आप जैसे महानुभाव अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग कर संस्था को सहयोग प्रदान कर राष्ट्र निर्माण व जीवदया हेतु अपनी सहभागिता प्रदान करेंगे ऐसा हमारा विश्वास है।


विज़न :-
वैश्विक स्तर पर एक ऐसे समाज का निर्माण जिसमें सभी नैतिकता प्रिय, दयालु, अहिंसक, सुसभ्य, सुरक्षित, सुशिक्षित, स्वस्थ सक्षम और आत्मनिर्भर हों जहां आदर्श संविधान, निष्पक्ष न्याय, शुद्ध राजनीति, ईमानदार सत्ता मौजूद हो और उस समाज मे जागरूक व स्वाभिमानी नागरिक मानवीय धर्म की पालना करते हुए प्राणी मात्र की सेवा कर प्रकृति का सम्मान करते हों।


मिशन:-
संस्था भारत देश को अपराध रहित, शिक्षित, मजबूत अर्थव्यवस्था, भरपूर चिकित्सा सुविधाएँ और एक विकसित देश के रूप में देखना चाहती हैं, संस्था गरीबी, अपराध, अन्याय, अशिक्षा, चिकित्सा सुविधाओं की कमी, असामाजिकता के खिलाफ जनसहयोग से लड़ते हुए बाल मजदूरी विधवाओं, बुजुर्गों, श्रमिकों, किन्नरों, वेश्यावृत्ति के दल-दल में फसी नारी शक्ति व अन्य जरुरतमंदों को उनका हक दिलाना चाहती हैं। संस्था का मुख्य उद्देश्य गरीबी उन्मूलन एवं कमजोर व बेसहारा लोगों की समस्याओं को किसी भी तरह से हल करके उनकी मदद करना व प्राणी मात्र की सेवा करना है। संस्था का मकसद राष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसा संगठन खड़ा करना है जो समाज में व्याप्त सामाजिक बुराईयों, भ्रष्टाचार, अन्याय, अत्याचार, अनाचार, शोषण इत्यादि के खिलाफ बिना किसी दबाव में आये, आम आदमी व प्राणी मात्र की लड़ाई लड़ सके। और निडरता व निष्पक्षता से बगैर यह देखे की अन्याय का वजूद (ताकत) क्या है, अपना कार्य कर सके। संस्था का लक्ष्य प्राणी सेवा करते हुए सुसभ्य, शिक्षित व समृद्ध समाज का निर्माण एवं भारत को विश्वगुरु बनाकर वैश्विक स्तर पर प्राणी सेवार्थ कार्य करना है। निश्चित ही जिस दिन अच्छे लोगों से बुरे लोग भयभीत होने लगेंगे उस दिन हमारा समाज समृद्ध और भारत विश्वगुरु बन जायेगा।

 

संस्था के उद्देश्य :

1) जरुरतमंद वर्ग की मूलभूत आवश्यकताएं जैसे-रोटी कपड़ा मकान, स्वास्थ्य व शिक्षा आदि के लिए प्रयास एवं समुचित विकास हेतु मार्गदर्शन व सहयोग प्रदान करना। राष्ट्रीय एवं सामाजिक एकता पर कार्य करना, स्वच्छता अभियान चलाना।

2) शासन की जनउपयोगी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाना तथा शासन की नीतियों-नियमों के अनुपालन में सक्रीय सहभागिता व प्रसार-प्रचार करना। शिक्षा तकनीकी तथा व्यवसायिक शिक्षा के प्रचार के लिए स्कूल, कॉलेज तथा प्रशिक्षण केंद्र विद्यालय और महाविद्यालय की स्थापना करना तथा उनका संचालन करना। 

3) पशु चिकित्सा एवं पशु स्वास्थ्य के प्रति संस्था की भागीदारी को सुनिश्चित करते हुए पशुओं के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरुक करना तथा पशुवध, गौहत्या आदि को रोकने के सतत प्रयास करते रहना साथ ही शाकाहारी समाज का निर्माण एवं सम्पूर्ण प्राणियों की चिकित्सा, भोजन एवं निवास आदि की हरसंभव व्यवस्था करना भी संस्था की प्राथमिकता रहेगी। 

4) समिति स्तर पर स्वसहायता समूहों का गठन करते हुए मानव समाज के प्रत्येक वर्ग के हित, विकास एवं उन्नति हेतु निःस्वार्थ भाव से कार्य करने के साथ ही सम्पूर्ण मानव जाति व प्राणियों के कल्याण हेतु कार्यक्रमों का आयोजन व उनका क्रियान्वयन करना।

5) कृषि एवं उद्यानिकी विकास व विस्तार की गतिविधियों को बढ़ावा देने के कार्य करना, पेय जल, स्वच्छता एवं साफ-सफाई, परिवार कल्याण के कार्यक्रमों में भागीदारी कर सामुदायिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना। 

6) सामुदायिक सशक्तिकरण, अजिविका उन्नयन तथा विकास के कार्य करना, महिलाओं तथा विकलांगों के सामाजिक तथा सशक्तिकरण के लिए कार्य करना।

7) हस्तकला, शिल्पकला, वास्तुकला, हथकरघा, संगीतकला, चित्रकला, नृत्यकला, ललितकला, आदिवासी लोक अनुसंधान, लोक गायन इत्यादि केविकास के लिए प्रयास करना एवं भारत की सामाजिक सांस्कृतिक परिवेशों को ध्यान में रख कर विकास के माध्यम ढूंढने का प्रयास करना।

8) पीड़ित, विधवा, निराश्रित विकलांग, असहाय, जरुरतमंद गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले, झुग्गी-झोंपड़ी वासी पर्वतीय क्षेत्र के अ.जाति, अ.ज.जाति व पिछड़े वर्ग एवं अल्पसंख्यक तथा जरुरतमंद महिलाओं एवं बच्चों के कल्याणार्थ शिक्षण देना व सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, व टाईपिंग, कम्प्यूटर, पेंटिंग, संगीत, हस्तशिल्प प्रशिक्षण एवं झूलाघर आगनबाड़ी बालवाड़ी बालविकास केन्द्र, शिशु रक्षा केन्द्र, अनाथालय, बाल सम्प्रेषण गृह का संचालन करना।

9) निःशुल्क नेत्र व स्वास्थ्य की जांच करवाना एवं स्वच्छता कार्यक्रम का प्रचार-प्रसार करना एवं अंधापन, एड्स, कुपोषण, टीवी, कैंसर आदि घातक बीमारियों की रोकथाम हेतु प्रचार-प्रसार करना एवं इनकी सहायता करना।

10) सूचना प्रोद्योगिकी के समस्त साधनों द्वारा नागरिकों को उनके अधिकारों तभी शासन द्वारा प्रदत्त उनके अधिकारों को बताना एवं लोक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अंतर्गत तथा अन्य नीतियों के क्रियान्वयन के लिए लोक नाट्य संस्था बनाकर ग्रमीणों को उन्हीं की भाषा में सूचना प्रदान करना. नागरिको के मूलभूत व कानूनी अधिकारों के सरक्षण तथा सम्मान के लिए कार्य करना।

11) मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक कलात्मक विरासत के विकास, उन्नयन एवं प्रचार-प्रसार हेतु गतिविधियां संचालित करना साथ ही प्रदेश की लुप्त हो रही प्राचीन लोककला, सांस्कृतिक को उभारने हेतु क्रियान्वयन करना, जन जाग्रति कार्यक्रम करना, परिवहन क्षेत्र एवं सड़क सुरक्षा, मनोरंजन क्षेत्र में कार्य करना।

12) पर्यावरण कार्यक्रम चलाना एवं वृक्षारोपण करना व नर्सरी पेड़-पौधों का संरक्षण करना, वन्य संरक्षण, जल संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण करना, प्रदेश में। खेल-कूद के क्षेत्र में क्रियाशीन खेल प्रतिमाओं को प्रोत्साहित करने हेतु योजना क्रियान्वयन करना एवं प्रदेश के अ.जाति, अ.ज.जाति व पिछड़े वर्ग कल्याणार्थ रचनात्मक योजनाएं तैयार करना और उनके सामाजिक विकास संबंधी प्रयत्न करना।